एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने सौंपा 10 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन
एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने सौंपा 10 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन

100 दिन में नियमितीकरण का वादा 18 माह बाद भी अधूरा
मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर जताया विरोध, प्रदेशभर में आंदोलन की चेतावनी
अंबागढ़ चौकी:-
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास पहुँचकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को 10 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों का कहना है कि चुनाव पूर्व भाजपा ने “मोदी की गारंटी” में 100 दिनों के भीतर नियमितीकरण का वादा किया था, लेकिन सरकार के 18 महीने बीतने के बाद भी उनकी मांगें अब तक पूरी नहीं हुईं।
ज्ञापन में कर्मचारियों ने नियमितीकरण, ग्रेड पे निर्धारण, पारदर्शी स्थानांतरण नीति, लंबित 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि सहित कुल दस प्रमुख मांगें रखीं। इसके साथ ही चिकित्सा बीमा, अनुकम्पा नियुक्ति और कार्य मूल्यांकन की पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी शामिल रहे।
ये हैं 10 सूत्रीय प्रमुख मांगे:
नियमितीकरण/संविलयन,ग्रेड पे निर्धारण,पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना,पारदर्शी स्थानांतरण नीति,चिकित्सा अवकाश व सुविधाएं,अनुकम्पा नियुक्ति,नियमित भर्ती में आरक्षण,कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता,₹10 लाख तक कैशलैस चिकित्सा बीमा,लंबित 27% वेतन वृद्धि
कर्मचारियों ने कहा कि भाजपा के घोषणा पत्र में किए गए वादे को लेकर उन्हें आशा थी कि सत्ता में आते ही सरकार प्राथमिकता से इस पर निर्णय लेगी। संविदा कर्मचारियों का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार के समय जब वे आंदोलन कर रहे थे, तब भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने मंच साझा कर समर्थन जताया था और भरोसा दिया था कि उनकी मांगें पूरी होंगी।
18 माह, 155 ज्ञापन फिर भी हल नहीं
एनएचएम संघ के अनुसार, बीते 18 महीनों में प्रदेशभर के कर्मचारी 155 बार ज्ञापन, निवेदन और आवेदन सौंप चुके हैं। लेकिन अभी तक न तो नियमितीकरण हुआ है और न ही कोई ठोस पहल सामने आई है। इससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
बरसात के मौसम में बिगड़ सकती हैं स्वास्थ्य सेवाएं
संविधानिक अनदेखी और उपेक्षा के चलते एनएचएम कर्मचारी एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो जल्द ही 16,000 से अधिक कर्मचारी एकजुट होकर व्यापक आंदोलन करेंगे। इससे उप स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर मेडिकल कॉलेजों तक की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसका सीधा असर जनता पर पड़ेगा।
कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए, ताकि उन्हें आंदोलन का रास्ता न अपनाना पड़े।
