युक्तियुक्तकरण के बाद अब संलग्नीकरण का खेल शुरू — शिक्षा विभाग की नीयत पर सवाल
युक्तियुक्तकरण के बाद अब संलग्नीकरण का खेल शुरू — शिक्षा विभाग की नीयत पर सवाल

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी:-
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शुरू की गई युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया अभी पूरी तरह लागू भी नहीं हो सकी थी कि शिक्षा विभाग ने इसके समानांतर संलग्नीकरण का खेल शुरू कर दिया है। इससे न केवल विभाग की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अंचलों के स्कूलों में फिर से शिक्षक Subject की स्थिति बनने लगी है।
शासन का उद्देश्य स्पष्ट था — जहां शिक्षक अधिक हैं, वहां से उन्हें हटाकर जरूरतमंद स्कूलों में पदस्थ किया जाए। लेकिन जिले में यह योजना दिखावे से ज़्यादा कुछ नहीं बन पाई। युक्तियुक्तकरण को लागू हुए एक महीना भी नहीं बीता कि विभाग ने मनमाने संलग्नीकरण आदेश जारी कर दिए।
7 जुलाई 2025 को जारी पत्र के अनुसार जिन शिक्षकों को लाभ पहुंचाया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
सपना तिग्गा, अनिता नेताम, पायल कोकिला, रनविजय देवांगन, डुकेश कुमार तिवारी, कुमारी कविता, मितेश कुमार साहू, तथा उमा शंकर।
इन शिक्षकों को “योजना के तहत” पदस्थापना का लाभ देकर कुछ विद्यालयों से हटाकर अन्यत्र संलग्न कर दिया गया है — जबकि जिन स्कूलों में इनकी जरूरत थी, वहां अब फिर से पढ़ाई ठप होने की कगार पर है।
सवाल यह है —
क्या युक्तियुक्तकरण केवल दिखावे की कार्रवाई थी?
क्या संलग्नीकरण अब नया “स्थानांतरण घोटाला” बनता जा रहा है?
क्या विभाग फिर एक बार नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेतों को लाभ पहुंचा रहा है?
ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्कूलों में हालात यह हैं कि एक भी शिक्षक उपस्थित नहीं है, और बच्चे खुद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में संलग्नीकरण के बहाने शिक्षकों को “आरामगाह स्कूलों” में भेजना शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ नहीं तो और क्या है?
जब हमने इस बारे में प्रतिक्रिया जानने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से मीडिया से दूरी बनाए रखी और कोई भी जवाब देने से कतराते नजर आए।
इस चुप्पी से सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं — आखिर शिक्षा विभाग किस बात को छिपाने की कोशिश कर रहा है?
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस खबर के बाद जागता है या हमेशा की तरह “खानापूर्ति” कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देता है।
